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शनिवार, 17 नवंबर 2018

शनिवार, नवंबर 17, 2018

जागो बहुजन जागो अपने हक और अधिकार के लिए - ब्राह्मण वाद का अंत हो / jago bahujan jago braman vad ka ant ho

                          🔰मुक्ति का मार्ग🔰

तुम्हारी मुक्ति और उन्नति का मार्ग धर्मशास्त्र व मंदिर नहीं है, बल्कि तुम्हारा उद्धार कड़ी मेहनत करके प्राप्त की गई उच्च शिक्षा व्यवसाय बनाने वाले रोजगार तथा उच्च आचरण व नैतिकता में निहित है। तीर्थयात्रा व्रत पूजापाठ व कर्मकांडों में कीमती समय बर्बाद मत करो। धर्मग्रंथों का अखण्ड पाठ करने, यज्ञों में आहुति देने व मंदिरों में माथा टेकने से तुम्हारी दासता दूर नहीं होगी। तुम्हारे गले में पड़ी तुलसी की माला या कोई ताबीज तुम्हे मुक्ति नहीं दिलाएगी। जो कहीं है ही नही ऐसी काल्पनिक देवी या देवता के पत्थर से बनी पुतला जिसे हम सब मूर्ति कहते है के सामने मथा टेकने या फिर नक रगड़ने से दरिद्रता व गुलामी दूर नहीं होगी। अपने पुरखों की तरह तुम भी चीथड़े मत लपेटो, दड़बे जैसे घरों में मत रहो और इलाज के अभाव में तड़प तड़प कर जान मत गवाओं। भाग्य और ईश्वर के भरोसे मत रहो, तुम्हे अपना उद्धार खुद करना है । धर्म मनुष्य के लिए है, मनुष्य धर्म के लिए नहीं है। जो धर्म तुम्हे इंसान नहीं समझता वह धर्म नहीं अधर्म का बोझ है। जहां ऊंच नीच की व्यवस्था है, वह धर्म नहीं गुलाम बनाने की साज़िश है।

डॉ० भीम राव अंबेडकर

.* ब्राह्मण ना तो भूतों से डरता है,
 * ना ही डरता है मरी शमशान से,
 * वो ना डरता है किसी भगवान से,

 * वो डरता है शुद्रों को हक अधिकार देने से।

 * वो डरता है शुद्रो को बराबरी का दर्जा देने से।
 * वो डरता है  एससी, एस टी, ओबीसी से जो शुद्र है,

 * वो कहीं उनसे आगे ना निकल जाये।

 * वो डरता है ऊनके फैलाये हुये अंधश्रद्धा से

 * कहीं एससी, एस टी, ओबीसी बाहर ना निकल जाये।

 * वो डरता है सबकी समानता से,
 * वो सोचता है, अगर कोई नीच ही नही रहेगा तो वो ऊँचा कैसे रहेगा। 


* वो डरता है, एससी, एस टी , ओबीसी से क्योंकि अगर
 * जाति आधार पर आरक्षण दिया जायेगा।
 तो शुद्र अपनी तरक्की कर लेगा।
 * और ऊसकी चुँगल से बाहर निकल जायेगा।
 * खुद जागेगा और औरों को भी जगायेगा।
 * वो ऐसी हर उस बातों से डरता है।

 * कहीं  एससी, एस टी, ओबीसी एक हो गया तो फिर इस देश का नियंत्रण न्यायपूर्ण समानता से संपूर्ण देश
 को चलायेगा और उनका काला चिठ्ठा बाहर निकालेगा।
 और उनको दंडित भी करेगा।

 * इस लिये हर हाल में वह  एससी, एस टी, ओबीसी को कभी एक होने नही देगा।

 * वह हर हाल में अपना प्रभुत्व नही छोडेगा उसके लिए चाहे कितने ही लोग मरे।
 * चाहे देश हजारों साल पीछे चला जाये।
 * उसे अपने स्वामित्व तथा प्रभुत्व से मतलब है।
 * उसे अपनी और अपने समुदाय की छोड
 देश में किसी कि कोई परवाह नही है।

 * देश कि जनता को गंभीरता से सोचना पडेगा।
 * वह कैसे हालात वाला देश चाहती है।

 * सत्ता तख्ता पलट होना चाहीए।
 * अपनी सत्ता  के अस्तित्व रहने के लिए  इन्होंने क्या क्या षडयंत्र किये गये यह सब जनता को पता है।
 * इसके बावजूद भी जनता क्या सोचती है।
 * वह तो जनता जनार्दन पर ही निर्भर है।

 वो डरता है तो सिर्फ,. .. .
 * डा० बाबा साहब भीम राव  अम्बेडकर और उनके संविधान से....

अंधविश्वास, ढोंग,पाखण्ड, असमानता, ढकोसला, छुआछूत बेईमानी, भगाओ सच्चे भारतीय बनो।

 अब भी जातिवाद का जहर बड़ी तेज़ी से बढ़ता जा रहा है जातिवाद खत्म करो।

आज भी एक अनपढ़ पांचवीं फेल पंडित पंडित कहलाता है और दलित Engineer, doctor, professor, scientist, officer, Ph d किया हुआ भी शूद्र या दलित कहलाता है आखिर क्यों अभी तक जातिवाद फैलाया हुआ है।
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🙏 * आदिवासी हल्बा समाज🙏

गुरुवार, 13 सितंबर 2018

गुरुवार, सितंबर 13, 2018

आदिवासी आरक्षण का कर्ज और फर्ज / aadivasi aarkshan ka karj aur farj



                         भारतीय संविधान के शिल्पकार डा . बाबा साहेब अम्बेडकर जी की अध्यक्षता में २६ नवम्बर १९४९ को भारत में संविधान का निर्माण अर्थात जन्म हुआ |दयनीय दशा में जी रहे उन सभी लीगो की जीवन शैली अच्छी अच्छी हो,सभी लोगो को बराबरी में लेन के लिए उन्हें संपूर्ण मूलभूत हक अधिकार मिलने चाहिए इस हेतु २६ जनवरी १९५० को भारत में मानवतावादी ग्रन्थ "मानवतावादी भारतीय संविधान " लागु हुआ (संपूर्ण क्रियान्वयन अभी भी बाकि है )

                                                                           भारत में  "मानवतावादी भारतीय संविधान " लागु होने के पहले ब्राह्मण/हिन्दू सामाजिक व्यवस्था (B.S.O.) मनु का कानून लागु था | जिसमे ऊँची जाति ,नीची जाति ,छुआछूत ,जाति-पाति ,वर्ण व्यवस्था (ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शुद्र,अतिशूद्र,अछूत,सछुत ) अर्थात सामाजिक क्रमिक असमानता  (ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शुद्र,अतिशूद्र,अछूत,सछुत ) उस व्यवस्था में उस अमानवीय कानून व्यवस्था के हिसाब से सभी नीची जातियों और जमातियो को पढ़ने ,लिखने का,वोट डालने का अधिकार नहीं था |

यहाँ तक की जब थूकना होता था तो गले में हांड़ी होना जरुरी था हमारे पैर के निशान जमीन पर न रहे इसके लिए हमारे पूर्वज कमर में झाड़ू बंधकर चलता था | हमारे पूर्वजों की दयनीय दशा और अमानवीय कला क्या था जानने और समझने के लिए "पुस्तक मनुस्मृति " लेखक मनु महाराज मनुवादी का अध्ययन निहायत जरुरी है |

                                            लेकिन अभी हम देख रहे है की मानवतावादी भारतीय संविधान के लागू होने से   (ब्राह्मण,क्षत्रिय,वैश्य,शुद्र,अतिशूद्र,अछूत,सछुत ) देश के सभी जातियों में समानता आई | मानवतावादी भारतीय संविधान के बदौलत दिनों -दिन सभी नीची जातियों और जमातियो लोगो का उन्नति का मार्ग खुल गया है ,जो की डा .बाबा साहेब अम्बेडकर की देंन  है |जिन्होंने अपने जीवन में अनेक कष्ट झेलकर भी समस्त मूलनिवासियो समाज के लोगो के उन्नति का द्वार खोला |हम उस महान्तावादी,विश्व भूषण भारत रत्न डा .बाबा साहेब अम्बेडकर जी के ऋणी है जो हम आदिवासियों को अनेकानेक मूलभूत अधिकार मानवतावादी भारतीय संविधान आरक्षण =(प्रतिनिधित्व ) के माध्यम से हम आदिवासियों को दिये |
                                                यदि आदिवासी  समाज को अपनी आन्दोलन कामयाब करना है तो जल जंगल जमीन के साथ संस्क्रती और संविधान को जोड़ना होगा और इसे डा . बाबा साहब अम्बेडकर के विचारधारा को आधार देना होगा |
                                            आदिवासी संस्कृति और जमीन पर स्वामित्व इन बातोँ में ही आदिवासी अधिकार प्राप्त होता है |इसलिए हमें अपना जमीन एवम संस्कृति (आदिवासी धर्म) की रक्षा करनी चाहिए अन्यथा गैर आदिवासी बन जायेंगे |
                                            मूल निवासी = ९०% बहुजन समाज = (अनुसूचित जनजातिय , जनजातिय,अन्य पिछड़ा वर्ग,धार्मिक अल्पसंख्यक ) की मुक्ति वैसे ही देश और दूनिया का उद्धार डा . बाबा साहब अम्बेडकर की वैश्विक विचार धारा से  ही संभव हो सकती है |

                                                                                                                 सौजन्य 

                                           हल्बा हल्बी समाज छत्तीसगढ

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